पहचान
पार्टी में बहुत चहल पहल थी , जो होना लाजिमी भी है क्योंकि शहर के सबसे अमीर किशनदास के बेटे की शादी जो थी। पार्टी में एक से एक बड़े नामचीन लोग जो या तो खुद बड़े धनाढ्य थे या अपने विधा में महारत हासिल लोग। और इस पार्टी में उन बड़े लोगो की पत्नियां भी थी जो जगह जगह एक ग्रुप में बातचीत कर रही थी। मुद्दा किसी का मेकअप , किसी का हेयर स्टाइल , किसी का चरित्र चित्रण ; या किसी की व्यक्तिगत जिंदगी के बारे में टीका टिप्पणी। तभी उन महिलाओं की नज़र पार्टी में अभी-अभी आये एक मेहमान पर पड़ जाती है। उनमे से शायद एक ने उसे पहचाना ," अरे यह तो शिवानी है जो हमारे साथ कॉलेज में थी पर यह यहाँ कैसे? " उसका कौतुहल बढ़ गया और वह खुद मेहमान के पास पहुंची और उसे याद दिलाया कि वह उनकी कॉलेज में थी। . उस महिला ने मुस्कराते हुए कहा "हाँ मुझे याद है और ख़ुशी भी कि इतने सालों बाद भी तुम लोगों ने मुझे पहचान लिया। बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा “तुम्हारे पति न...