बड़े दिलवाला
बड़े दिलवाला
'भैया दो किलो आटा देना ', "जी बहन जी " कहते हुए जब भोला ने सामने से चेहरा देखा तो चौंक पड़ा "अरे बिटिया आज तुम क्यों चली आई हो? सामान लेने के लिए घर का नौकर कहा चला गया ?और क्या चाहिए सामान में? "कुछ नहीं , अभी बस दो किलो आटा ही चाहिए" पारुल ने संकोच से कहा।
भोला को ये सब अजीब सा लगा , पर उसने पारुल को दो किलो आटा दे दिया, पर उसके मन में यह बात खटक रही थी कि हजारों का बिल बनता था अब अचानक ऐसा क्या हो गया?
उसने सोचा बात कुछ जरूर है। शाम को दुकान बंद करके सीधा पारुल के घर पहुंचा। अचानक उसे देखकर पारुल चौंक गई और हड़बड़ाते हुए उसने पुछा "आप " '’ अरे बिटिया इधर से गुजर रहा था तो सोचा पिंकी बिटिया से भी मिल लूँ।‘’ तभी पारुल की बिटिया पिंकी वहां आती है और भोला अंकल से चॉकलेट पाकर खुश हो जाती है। भोला झिझकते हुए पारुल से पूछता है क्या बात है बिटिया सब ठीक तो है ना? पारुल ने झूठी मुस्कुराहट के साथ कहा " हाँ चाचा सबठीक है.’’ . बिटिया एक बात पूँछे ? तनिक संकोच हो रहा है। पर रहा नहीं गया इसलिए पूँछ रहे है। हाँ , हाँ चाचा पूछिए ना पारुल ने कहा।
"बिटिया हर महीने हजारों का सामान जाता था , नौकर लेने आता था। आज तुम आयी थी वो भी बस दो किलो आटा सब ठीक है ना बिटिया ?"
भोला की स्नेह भरी बात सुनकर पारुल का मन भर आया। उदासी के साथ कहा " नहीं चाचा सब ठीक नहीं है , इनकी नौकरी छूट गयी है , कब मिलेगी , पता नहीं। इसलिए सब सोच समझकर करना है। "
अरे बिटिया हमको इतना गैर समझती हो? 'बेटवा की नौकरी छूट गयी और हमको बताया तक नहीं ' भोला ने तनिक नाराजगी से कहा। "हमारी दुकान भी तो तुम्हारी ही है। पटरी पर सामान बेचते थे तब तुमने और संजय बेटवा ने हमारी कितनी मदद की, दुकान दिलवाने से लेकर सामान जुटाने तक। आज तुम्हारे ऊपर मुसीबत आयी तो हमको गैर बना दिए "
नहीं चाचा , पारुल बीच में ही बोल पड़ी , कुछ दिन की बात है , सब ठीक हो जाएगा। हाँ , हम भी तो वही कह रहे है बिटिया कि कुछ दिन का ही बात है , और जब तक संजय बेटवा का नौकरी फिर न लग जाए तब तक घर का सारा सामान पहले की तरह तुम्हारे चाचा की तरफ से।
"लेकिन चाचा ", " लेकिन वेकिन कुछ नहीं ,चाचा मानत हौ तो हमार बात मान लो , नहीं तो हम समझेंगे कि हम तुम्हारे चाचा नहीं" कहते हुए भोला वहाँ से चला गया और पारुल जाते हुए उस बड़े दिलवाले को एकटक देख रही थी।
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