Posts

पहचान

 स्नेहा एक होनहार छात्रा  होने के साथ-साथ एक कुशल नृत्यांगना भी थी और वह भी बिना किसी गुरु के मोबाइल में नृत्य प्रस्तुतियों को देखकर कभी-कभी टीवी के कार्यक्रमों को देखकर स्वयं की सृजनशीलता ने उसके नृत्य में चार चांद लगा दिया ।स्नेहा पढ़ने में तो होशियार तो थी लेकिन पिता का साया सर से जल्दी उठ जाने के कारण स्नातक स्तर से ही घर की जिम्मेदारियां उसके ऊपर आ गई सभी बहनों की शादी हो गई थी । भाई नहीं था लिया था सब कुछ संभालने की जिम्मेदारी स्नेह के कंधे पर आ गई । पर बिना किसी शिकायत के स्नेहा ने किस्मत के फैसले को मंजूर करते हुए घर और मां को भी संभाल लिया बस एक मन में हमेशा एक कसक रहती उसका नृत्य प्रेम अधूरा रह गया। पढ़ाई घर सब कुछ संभालने में उसके लिए समय ही नहीं मिलता और शौक से घर का खर्च तो चलता नहीं इसलिए उसने शौक और घर में से घर को चुना पर कहते हैं ना पहला प्यार कभी मरता नहीं ।जब कभी वह नृत्य की प्रस्तुति टीवी मोबाइल या किसी कार्यक्रम मैं देखती तो उसके मन में एक टीस जग जाती स्नेहा जिंदा तो थी पर उसकी सांसे नृत्य में ही बसती थी।  एक दिन ऑफिस में एक महिला स्नेहा के सहयो...

सेवानिवृति

  आज ऑफिस में बहुत चहल पहल थी। कोना कोना शीशे की तरह चमक रहा था और चमकना भी चाहिए था क्योंकि आज ऑफिस के सबसे वरिष्ठ सफाई करनी रमेश जी का रिटायरमेंट था उनके सम्मान में आज ऑफिस में पार्टी रखी गई थी छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े साहब तक रमेश जी के मुरीद थे 35 साल की नौकरी में उन्होंने कभी किसी को शिकायत का मौका नहीं दिया ।किसी की छुट्टी हो किसी को जल्दी जाना हो या किसी के हिस्से का काम रमेश जी हर किसी काम कर देते थे। सफाई कर्मी होने के साथ-साथ वह स्नातक भी थे उनके ऑफिस के साहब लोग भी अपना छोटा मोटा काम दे देते थे। कभी न थकने वाले सदैव मुस्कुराने वाले सब के प्रिय रमेश जी का आज अंतिम कार्य दिवस था सभी बड़ी बेसब्री से उनका इंतजार कर रहे थे पर आज तक कभी ऑफिस देर से ना आने वाले रमेश जी आज समय के बाद भी नहीं आए। सभी फोन पर फोन कर रहे थे पर फोन उठ नहीं रहा था । सभी परेशान थे कि आखिर रमेश जी को क्या हुआ? रमेश जी बेमन से तैयार हो रहे थे पर जैसे खुशी छीन सी गई हो 35 साल की नौकरी अब आदत सी बन गए थी और आज वह आदत छूटती सी लग रही थी सब जिस सेवानिवृत्ति का इंतजार करते हैं वह रमेश जी के लिए बोझ ...

बेटी

 कहा जाता है कि बेटियां लक्ष्मी रूप होती है और जिस घर में बेटियां लक्ष्मी रूप होती हैं और जिस घर में बेटियां होती हैं वह घर सौभाग्यशाली होता है पर आज भी कहीं ना कहींलोगों के मन मे बेटों की चाह रहती ही है पर मेरा मन सदा ही बेटियों को  चाहता था। पर मुझे एक बेटी का पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त न हो सका।  दो बेटे दोनों पढ़ लिखकर अपनी अपनी दुनिया में खुश थे घर में बच्चे बस में और मेरी श्रीमती जी। सरकारी नौकरी से रिटायरमेंट के बाद  पेंशन से घर अच्छी तरह चल जाता था पर अकेलापन काटने को दौड़ता था इसलिए एक मेडिकल  स्टोर खोल दिया था सारा दिन उसमें रहता था  शाम को किसी  बगीचे में टहलकर  आता था कोई कमी नहीं थी  बस बेटी की कमी खलती थी।  एक शाम मेडिकल स्टोर पर एक बिटिया दवा की पर्ची लेकर आई और बोली " अंकल यह दवाई दे दीजिए और पूरा बता दीजिए कितने पैसे देने हैं"। मैंने उसकी ओर देखा। फिर पर्चे को देखा काफी दवाईयां थी और महंगी भी। मैंने बोला " बेटा कुल मिलाकर ₹3000 हुए ।कोई हॉस्पिटल में भर्ती है क्या " "जी मेरी मम्मी का ऑपरेशन हुआ है उन्हीं की   ...

धन्यवाद

 "डॉक्टर साहब मेरे पापा को बचा लीजिए प्लीज डॉक्टर साहब थोड़ा सा समय दीजिए एक बार देख लीजिए उनको"आरुषि ने लगभग रोते हुए कहा ।श्रीकांत ने नर्स से पूछा "क्या केस है इनका" "सर उनके पिता का एक्सीडेंट हो गया है गंभीर चोट आई है अगर सर्जरी 1 घंटे में नहीं की गई तो उनका बचना मुश्किल है" "तो क्या समस्या है? सर्जरी की तैयारी करिए" श्रीकांत ने कहा। " सर उनके पास पैसे नहीं है फीस के फिर कैसे?" आरुषि ने हाथ जोड़कर कहा " सर प्लीज आप ऑपरेशन कर दीजिए एक या दो दिन में मैं आपके पैसे दे जाऊंगी नहीं तो आप छुट्टी नहीं करिएगा अभी मेरे पास बस यह एक सोने की अंगूठी है वह आप ले लीजिए प्लीज मेरा भरोसा करिए" " देखिए फीस हॉस्पिटल में जमा करना होता है मुझे नहीं मैं कैसे यह कर सकता हूं?" सर प्लीज आप कुछ करिए आपकी मदद भी तो कभी किसी ने की होगी" उसने याचना भरे स्वर में कहा श्रीकांत जैसे अचानक से यादों में खो जाते हैं फिर कहते हैं "चलिए देखते हैं क्या मामला है? मैं क्या कर सकता हूं ?श्रीकांत आरुषि के साथ उसके पिता को देखने वार्ड में...

अपना घर

  राहुल श्रद्धा ने शहर में आलीशान मकान बनवा रखा था। घर में सुख सुविधा की कोई कमी नहीं थी। राहुल  के माता-पिता गांव में रहते थे। राहुल ने उनसे कई बार कहा कि कुछ दिन वह उनके साथ ही रहे लेकिन माता-पिता कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल देते। राहुल को यही बात समझ नहीं आती थी कि सब कुछ के बाद भी वह क्यों यहां रहना नहीं चाहते? इस बार आर्यन के जन्मदिन पर जब पोते ने बहुत जिद की तो राहुल के माता-पिता मना न कर सके और राहुल के पास आ गए। राहुल श्रद्धा व उनका बेटा आर्यन सब बहुत खुश थे। कुछ दिन राहुल के माता-पिता भी बहुत खुश थे पर कुछ दिनों बाद ही वह यह सोचने लगे कि कब और कैसे वापस जाएं उन्होंने राहुल से बात की राहुल ने उन्हें कुछ दिन और रुकने की जिद की पर वह नहीं माने आखिर राहुल ने बोल ही दिया कि वह उन्हें रविवार को स्टेशन छोड़ देगा। वह बहुत परेशान था कि आखिर क्या कमी रह गई है यहां जो उसके माता-पिता यहां नहीं रहना चाहते उसकी परेशानी देख श्रद्धा ने कारण पूछा तो राहुल ने सब उसे बता दिया श्रद्धा ने उससे कहा कि वह मां पिताजी को कुछ दिन उसके भाई के यहां भेज दे फिर वापस आने के बाद गांव जाने के लिए बो...

मदद

कड़ाके की ठंड रात के 12:00 बजे थे तभी दरवाजे की बेल बजती है । अनुभा चहकते हुए कहती है" लगता है खाना आ गया प्लीज जाकर देख लेना "अनुभा का पति राजीव जो अब तक फाइलो में उलझा था गुस्से से बोल " आज खाना भी नहीं बनाया और देखना भी मुझे ही पड़ेगा?" " प्लीज चले जाओ ना ठंड से हाल बुरा है नहीं तो चली जाती "अनुभा के मिन्नतों के बाद राजीव सीढ़ियों से उतरकर गेट खोलता है सामने डिलीवरी बॉय ने उसे थोड़ा जल्दी पैसे देने का अनुरोध किया वह ठंड से पूरी तरह कांप रहा था। कपकपाते स्वर में वह बोला" सर थोड़ा गर्म पानी मिल सकता है क्या ?" "क्यों नहीं ?"ऊपर वाला राजीव जो गुस्से में नीचे आया था डिलीवरी बॉय की दशा देखकर एकदम से सहृदय हो जाता है "तुम रुको मैं आता हूं पर एक बात बताओ इतनी ठंड में जहां लोग रजाई में भी कांप रहे हैं तुम बिना स्वेटर के क्यों हो "? "सर यह मेरी नौकरी का पहला महीना है सैलरी नहीं आई है गांव से नया-नया आया हूं जल्दी-जल्दी में कुछ सामान भूल गया जिसमें स्वेटर भी था नई नौकरी है छुट्टी मिले कि नहीं इसलिए बस काम चल रहा हूं" ...

अपना

 रोहन ने जब से नया मकान खरीदा था, हर रोज सुबह एक वृद्ध उसकी चौखट को बड़े प्यार से निहार कर चले जाते थे एक दिन रोहन से ना रहा गया बागवानी करते समय जैसे ही उसकी नजर उन पर पड़ी उसने तुरंत ही उन्हें रोक लिया और पूछा" बाबा आप कौन हैं रोज यहां क्यों आते हैं और कुछ ना तो मांगते हैं ना बोलते हैं चले भी जाते हैं आखिर ऐसा क्यों? इस कॉलोनी में और भी मकान है पर आप यही क्यों आते हैं क्या रिश्ता है आपका इस मकान से एक साथ?" न जाने कितने सवाल पूछ लिया उसने बुजुर्ग व्यक्ति बिना कुछ बोले वहां से चला गया जिससे रोहन की उत्सुकता और भी बढ़ गई उसने अपनी पत्नी अमृता को यह बात बताई उसने तुरंत ही सतर्क होकर बोला" देखो नई जगह है पता नहीं कौन क्या है हमारे तो बच्चे भी हैं जमाना ठीक नहीं है क्या पता किसके मन में क्या चल रहा है मैं तो कहती हूं कि चौकीदार रख लो तुम हर समय तो घर में रहते नहीं" " अरे अरे रुक जाओ मैं एक छोटी सी बात बताई और तुम तिल का ताड़ बनाने लगी ऐसा कुछ नहीं वह आदमी शक्ल से शरीफ लगता है ना तो उसने आज तक कुछ मांगा ऐसे किसी पर शक करना ठीक नहीं हां मेरे मन में उत्सुकता जरूर है ...