अब और नहीं
वैसे तो बरसात का मौसम मुझे बहुत पसंद हैं। पर उस रात की बरसात कुछ अजीब सी थी। बहार बूंदों का शोर और मन में अजीब सी तन्हाई न चाहते हुए भी कुछ बीते लम्हे , कोई चेहरा बार बार सामने आ रहा था। बड़ी मुश्किल से तो निजात पाई थी। मैंने खुद को उस झंझावात से बाहर निकाला था फिर आज अचानक से आज ये सब एकदम से सामने क्यों आ रहा था? खुद को समझाते हुए या यूँ कहे कि खुद से लड़ते हुए कब आँख लगी , पता ही नहीं चला।
रात के तीन
बज रहे थे , अचानक से मेरा मोबाइल बज उठा।
वैसे तो मेरा फ़ोन हमेशा साइलेंट ही रहता है रात मे। लेकिन उस दिन शायद उधेड़बुन में भूल गई। मोबाइल दो
बार बज के बंद हो चूका था। तीसरी बार में नींद खुली, बाहर अभी भी जोरदार बारिश हो रही थी। आँखे मलते हुए मोबाइल
देखा ,
मोबाइल स्क्रीन
पर जो नंबर आ रहा था वह देखकर नींद जैसे गायब से हो गई, और एक एक घटना आँखों के सामने
आने लगी। इतने शिद्दत से चाहा था
मैंने उसे बिना किसी उम्मीद के प्यार किया निस्वार्थ ।उस प्रेम का कोई पैमाना नहीं था। जैसे मैंने खुद को उसमे
ही मिला दिया हो ,इतना चाहा था उसे। चाहा था ? या चाहती हूँ आज भी? तभी तो इतनी परेशान हूं और
न चाहते हुए भी मैंने कॉल रिसीव कर ली।
काल रिसीव करते ही उधर
से आवाज आयी ," प्लीज़ फ़ोन मत काटना। आज जो कहना चाहता हूँ ,वो दिल से बोल रहा
हूँ। तुम्हे खोकर ही तुम्हारे प्यार को समझ पाया हूँ। प्लीज मुझे एक मौका दो। मुझे
जो सजा चाहो देना पर बस एक बार माफ़ कर दो मुझे। उसका गिड़गिड़ाना उसका एक एक
शब्द कानो में जैसे सकून दे रहा था। यही तो
मैं चाहती थी बस प्यार ,लेकिन उसने मेरी कोई कदर नहीं की। आज उसकी आवाज जैसे दिल को
सकून सा दे रही थी। और मैंने बिना कुछ बोले
फ़ोन बंद कर दिया।
सुबह जो हुआ
वह भी किसी सपने से कम नहीं था। आँखों पर यकीन
नहीं हो रहा था। अपने सामने किसी को कुछ न समझने वाला आज मेरे दरवाजे के बाहर याचक
की मुद्रा में खड़ा था।
चूँकि मैं नौकरी
की वजह से घर से दूर रहती हूँ इसलिए मुझे कोई ज्यादा जानता तो नहीं था।
पर घर के बाहर तमाशा नहीं
करना चाहती थी , इसलिए उसे अंदर बुला लिया। उसका चेहरा ख़ुशी से चमक उठा ,पर उसकी यह ख़ुशी मैंने ज्यादा देर तक रहने नहीं दी। इससे पहले कि वह कुछ हुए बोल पाता , मैंने उसे बाहर का रास्ता दिखाते हुए कहा ,"जैसे आये हो वैसे ही चले जाओ , जो तुमसे प्यार करती थी , वो अब यहाँ नहीं रहती। तुम्हारे सामने जो है , वह मै
हूँ जो खुद से प्यार करती हैं । " पर…….. , उसके स्वर अटक से गये " नही अब और नहीं। यह सुनकर वह चुपचाप दरवाजे से बाहर चला गया।
यह मेरे लिए भी आसान नहीं था , पर
अब दिल का बोझ जैसे
उतर सा गया हो। मेरी हर धड़कन जैसे
यही कह रही हो " बस अब और नहीं”.।
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