अपना घर

 

राहुल श्रद्धा ने शहर में आलीशान मकान बनवा रखा था। घर में सुख सुविधा की कोई कमी नहीं थी। राहुल  के माता-पिता गांव में रहते थे। राहुल ने उनसे कई बार कहा कि कुछ दिन वह उनके साथ ही रहे लेकिन माता-पिता कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल देते। राहुल को यही बात समझ नहीं आती थी कि सब कुछ के बाद भी वह क्यों यहां रहना नहीं चाहते? इस बार आर्यन के जन्मदिन पर जब पोते ने बहुत जिद की तो राहुल के माता-पिता मना न कर सके और राहुल के पास आ गए। राहुल श्रद्धा व उनका बेटा आर्यन सब बहुत खुश थे। कुछ दिन राहुल के माता-पिता भी बहुत खुश थे पर कुछ दिनों बाद ही वह यह सोचने लगे कि कब और कैसे वापस जाएं उन्होंने राहुल से बात की राहुल ने उन्हें कुछ दिन और रुकने की जिद की पर वह नहीं माने आखिर राहुल ने बोल ही दिया कि वह उन्हें रविवार को स्टेशन छोड़ देगा। वह बहुत परेशान था कि आखिर क्या कमी रह गई है यहां जो उसके माता-पिता यहां नहीं रहना चाहते उसकी परेशानी देख श्रद्धा ने कारण पूछा तो राहुल ने सब उसे बता दिया श्रद्धा ने उससे कहा कि वह मां पिताजी को कुछ दिन उसके भाई के यहां भेज दे फिर वापस आने के बाद गांव जाने के लिए बोले। राहुल ने वैसा ही किया अगले दिन श्रद्धा ने पूरे दिन घर में बिताया और वह समझ गई कि आखिर क्या कारण है कि उसके साथ ससुर यहां से जाना चाहते हैं। रविवार की सुबह राहुल ने मां पिताजी को अपने भाई के यहां जो कि इस शहर में कुछ दूरी पर रहता था वहां पर कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया। एक सप्ताह के बाद राहुल मां पिताजी को लेने वापस जाता है और घर लाता है। घर आते ही उसके मां पिताजी आश्चर्य से भर जाते हैं कि वह कहां आ गए? राहुल के आलीशान बंगले में बहुत से फूल उनका स्वागत कर रहे थे सिर्फ फूल ही नहीं बहुत सारे सुंदर-सुंदर फल भी अपनी और आकर्षित कर रहे थे। कुछ हिस्सा मिट्टी वाला भी था और आश्चर्य तब और बढ़ गया जब वह अपने कमरे में गए । कमरा बिल्कुल वैसा ही था जैसा गांव में उनका घर। राहुल के मां पिता आश्चर्य और खुशी के साथ एक दूसरे की ओर देख रहे थे तभी श्रद्धा हाथ में गरमा गरम चाय की प्याली लेकर आ गई और सासू मां को देते हुए बोली “लीजिए मां जी आपकी गरमा गर्म अदरक वाली चाय और बाबूजी आपका न्यूज़ पेपर हिंदी वाला” अब राहुल के पिताजी से चुप ना रहा गया वह बोले” बेटा यह सब क्या है?’ इस बार राहुल और श्रद्धा दोनों बोल पड़े ” पिताजी हमने बहुत जानने की कोशिश की कि आप सारे सुख सुविधाओं के बाद भी यहां क्यों नहीं रुकना चाहते ?इसलिए जो जो मुझे समझ आया वह सब करने की कोशिश की कि वह सब ठीक हो जाए बस कोशिश की कमी तो अभी भी हो सकती है” राहुल की मां ने कहा” बेटा हम भाग्यशाली हैं कि हमें तुम दोनों जैसे बेटा बहू मिले जिन्होंने हमें समझने का प्रयास किया तुमने ठीक कहा यहां कोई कमी नहीं थी पर अपने घर जैसा माहौल नहीं मिला अपने घर जैसा नहीं लगता था इसलिए यहां से जाने की बात मन में हमेशा रहती थी आज घर के आंगन में अपने घर के आंगन की खुशबू आई। कमरा देखकर ऐसा लगा जैसे अपना ही कमरा सब कुछ वैसा ही जैसा अपने घर” “ तो माँ जी फिर आप लोग अब यही क्यों नहीं रह जाते हमारे पास क्यों नहीं रुक जाते? रुक जाइए ना हम भी तो आपके बच्चे हैं हमें भी आपके इतने प्यार की जरूरत है कभी-कभी गांव की चले जाइएगा” राहुल की मां पिताजी ने बहू के सर पर हाथ फेरते हुए कहा” बेटा तुम्हारी जैसी बहू पर नाज है हमें आज जहां लोग मां-बाप को बोझ समझते हैं तुमने हमें इतना समझा अब इससे ज्यादा अपना क्या हो सकता है? जहां अपने लोग हो वही घर तो अपना होता है आज से हम यही रहेंगे” राहुल ने श्रद्धा के प्रति कृतज्ञता का भार जताते हुए उसे देखा और श्रद्धा ने संतोष भरी निगाह से उसे राहुल के मां पिताजी न जाने कितना प्यार लुटाते हुए अपने बेटे बहू और अपने नए घर को स्नेह की दृष्टि से देख रहे थे।

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