बड़े लोग


"मैम मैं घर जा रही हूँ काम हो गया।" "अच्छा ठीक है"। " रचना कुछ कहना था। "मैम मेरी बेटी बीमार है क्या मुझे 5000 रुपये मिल सकते हैं।" "क्या? अभी 5 दिन हुए तुम्हें काम पर आए और इतना बड़ा एडवांस..."

...एक इंजेक्शन बताया है जो 5000 का है काफी इलाज किया ठीक नहीं हो रहा उन्होंने कहा कि इससे वह ठीक हो जाएगी।" "तुम्हें भी दिमाग है मामूली सा बुखार है किसी सरकारी अस्पताल में दिखा दो ठीक हो जाएगी।" "नहीं मैडम काफी समय हो गया आप एडवांस समझ कर दे दीजिये।" "तुम पागल हो तीन महीने का एडवांस..."..कौन देता है  फालतू देने के लिए इतने पैसे नहीं हैं और अब मेरा दिमाग मत खाओ।" कामवाली रचना अपना मुँह लटकाकर चली गयी।

एक दिन बाद जब वह आई तो लतिका ने उससे खुद ही पूछा- "कैसी है तुम्हारी बेटी?" "ठीक है मैडम इंजेक्शन लग गया कुछ और दवा भी दी काफी ठीक हो गयी।" "इंजेक्शन कहाँ से आया? तुम्हारे पास इतने पैसे कहाँ से आये?" "मैडम कुछ बड़े लोगों ने मेरी मदद कर दी।" "अच्छा! कौन बड़े लोग?" लतिका ने पूछा। रचना ने सामने बैठे गार्ड, माली की ओर इशारा करते हुए कहा- "इन लोगों ने उधार दे दिया और कहा है कि पैसे आराम से देना बिटिया के ठीक होने पर।"

रचना के जाने के बाद लतिका गार्ड के पास...गई और गुस्से में बोली- "खुद  का तो खर्च चलता नहीं दान देने का शौक चढ़ा है। उसने पैसे न दिये तब।" गार्ड ने कहा- "मैडम उसका पति नहीं है अकेले सब संभाल रही है बेटी ही उसके जीने की एकमात्र वजह है। इसलिये दे दिया नहीं भी देगी तो कोई बात नहीं उसकी बेटी मेरी थी तो मेरी जैसी ही हुई।"

लतिका यह सुनकर शर्मिंदा हो गई। यही बात माली ने भी कही। लतिका को अपनी गलती का एहसास हुआ। दूसरे दिन रचना काम पर आई तो उसे लतिका ने बुलाया और कहा- "रचना आज से तेरी बेटी की जिम्मेदारी और उसकी पढ़ाई का खर्चा मैं लेती हूँ।" "पर मैडम ये तो बहुत बड़ा एहसान है।" "कोई बात नहीं'। रचना उसे धन्यवाद देते हुए  जाने लगी और लतिका के दिल से जैसे बोझ उतर गया कि बंगले के गार्ड और माली इतने बड़े दिलवाले हैं और उसने मालकिन होकर 5000 के लिए किसी की बीमारी को नहीं समझा।

जाते हुए रचना ने गार्ड से कहा- "भैया मदद के लिए धन्यवाद बहुत जल्द पैसे  वापस दे दूँगी।" यही बात माली से भी कही पर उन दोनों ने कहा "इसकी कोई जरूरत नहीं रचना हम पैसे पा चुके हैं।" "पा चुके हैं? किसने दिये आपको?" दोनों ने बरामदे में खड़ी लतिका की ओर इशारा किया कि मैम ने कल रात ही हमें बुलाकर पैसे दे दिये। रचना ने कृतज्ञता से लतिका की ओर देखा और लतिका ने मुस्कुराकर उसे विदा दिया। लतिका मन ही मन इस बात से खुश थी कि आज वह सही मायनों में 'बड़ी' हो पाई।

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