अपना

 रोहन ने जब से नया मकान खरीदा था, हर रोज सुबह एक वृद्ध उसकी चौखट को बड़े प्यार से निहार कर चले जाते थे एक दिन रोहन से ना रहा गया बागवानी करते समय जैसे ही उसकी नजर उन पर पड़ी उसने तुरंत ही उन्हें रोक लिया और पूछा" बाबा आप कौन हैं रोज यहां क्यों आते हैं और कुछ ना तो मांगते हैं ना बोलते हैं चले भी जाते हैं आखिर ऐसा क्यों? इस कॉलोनी में और भी मकान है पर आप यही क्यों आते हैं क्या रिश्ता है आपका इस मकान से एक साथ?" न जाने कितने सवाल पूछ लिया उसने बुजुर्ग व्यक्ति बिना कुछ बोले वहां से चला गया जिससे रोहन की उत्सुकता और भी बढ़ गई उसने अपनी पत्नी अमृता को यह बात बताई उसने तुरंत ही सतर्क होकर बोला" देखो नई जगह है पता नहीं कौन क्या है हमारे तो बच्चे भी हैं जमाना ठीक नहीं है क्या पता किसके मन में क्या चल रहा है मैं तो कहती हूं कि चौकीदार रख लो तुम हर समय तो घर में रहते नहीं" " अरे अरे रुक जाओ मैं एक छोटी सी बात बताई और तुम तिल का ताड़ बनाने लगी ऐसा कुछ नहीं वह आदमी शक्ल से शरीफ लगता है ना तो उसने आज तक कुछ मांगा ऐसे किसी पर शक करना ठीक नहीं हां मेरे मन में उत्सुकता जरूर है कि आखिर उनके आने का कारण क्या है" दूसरे दिन रोहन ने वृद्ध का हाथ पकड़ लिया और बोला "आप भले ही कुछ ना कहीं पर रोज यहां आते हैं मुझे तो आप घर के सदस्य जैसे ही लगते हैं आइए ना चाय पीते हैं "रोहन की बात सुनकर वृद्ध की आंखें जो अब तक गेट पर लगे नेम प्लेट को निहार रही थी उससे हटकर रोहन के चेहरे पर आकर रुक गई और उसने कहा" बस ऐसे ही आता हूं कोई बात नहीं" " ठीक है पर चाय तो पी लीजिए ना आखिर मैं भी तो आपके बेटे जैसा ही हूं "रोहन की बात सुनकर ना चाहते भी बुजुर्ग वहां रुक गए चाय पीते पीते रोहन ने कहा "बाबा आप कहां रहते हैं घर में कौन-कौन है ?"यह सुनकर आकाश की तरफ देखते हुए बुजुर्ग ने कहा "मेरा कोई नहीं है पत्नी का देहांत हो गया है बस और कोई नहीं "रोहन ने दुख जताते हुए सांत्वना भरे स्वर में कहा "बाबा ऐसा नहीं है आज से आप हमें अपना माने और हमारे साथ रहिए" " नहीं बेटा मैं किसी पर भार नहीं बनना चाहता " " बोझ कैसा ?आप वैसे भी यहां हो जाते हैं तो यहीं रुक जाइए"। बुजुर्ग बिना कुछ बोले वहां से चले गए रोहन ने अपनी पत्नी अमृता को सारी बात बताई वह गुस्से में बोली "तुम्हारा दिमाग खराब है क्या? सड़क के आदमी को घर पर रखोगे पता नहीं है कौन है क्या है और तुम हो कि बाहर के आदमी को सीधा घर में अंदर लाने की बात कर रहे हो " "नहीं उन्होंने अभी कुछ कहा नहीं है देखो वैसे भी घर में सीसीटीवी कैमरा है हम दोनों जब ऑफिस जाते हैं तो बच्चों की चिंता रहती है तो क्यों ना उन्हें केयर टेकर के रूप में रख ले वैसे भी न जाने क्या बात है रोज यहां आते हैं यही रहेंगे तो शायद उन्हें भी अच्छा लगेगा और हमारे बच्चों को एक बड़े का साथ मिल जाएगा कुछ दिन में अगर कुछ गलत हुआ तो खुद पता चल जाएगा वैसे भी इस उम्र में वह क्या कर पाएंगे "अमृता ने अपनी आधी स्वीकृति तो दे दी लेकिन उसे अंदर से मन में चिंता सता रही थी "रोहन ने कहा कल मैं फिर से पूछूंगा उनसे" अगली सुबह व्यक्ति को देखा तो फिर से पूछ लिया " बाबा आप रहेंगे हमारे साथ ?बच्चे हैं घर में आपका भी मन लग जाएगा " उन्होंने स्वीकृति में सर हिला दिया और अपने कुछ सामान के साथ वहां रहने चले गए कुछ दिनों घर में सब व्यवस्थित सा हो गया उन्होंने एक पिता के भांति जिम्मेदारियों को निभाया और रोहन के काम में हाथ बटाने के साथ-साथ बच्चों के साथ खेलना पढ़ाई में मदद करना उनका ख्याल रखना सभी चीजों की देखभाल अब बच्चे भी उनसे घुल मिल गए थे रोहन और अमृता को भी लगता ही नहीं था कि जैसे कोई बाहरी व्यक्ति है एक दिन अमृता अचानक से उनके कमरे में आई किसी काम से तो उसने देखा कि उस बुजुर्ग व्यक्ति की अलमारी खुली है और वह कमरे में नहीं है वह उसे अलमारी को बंद करने जाती है तभी एक डायरी नीचे गिर जाती है जिसमें कुछ फोटो भी थी और उसके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा जब उसने देखा कि उसे फोटो में उसका घर है और बुजुर्ग व्यक्ति अपनी जो अपनी युवावस्था में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ था उसे फोटो में ऊपर लिखा था "खन्ना फैमिली "अमृता को समझते देर न लगी कि माजरा क्या है ? जिस व्यक्ति से उन्होंने या घर खरीदा था विदेश में रहने वाला था और उसने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद और मकान को बेचना चाहता है तब तक बुजुर्ग व्यक्ति यानी कि मिस्टर खन्ना वहां आ जाते हैं और अमृता के हाथ में फोटो देखकर समझ जाते हैं कि उसे पता चल चुका है कि वह कौन है? अमृता ने आश्चर्य से पूछा "अंकल यह सब क्या है?" " बेटी मैं ही मिस्टर खन्ना हूं और यह घर मेरा ही था जिसे मेरे बेटे ने धोखे से कब्जा कर लिया और बेच दिया मुझे दर दर की ठोकर खाने को मजबूर कर दिया मैं अकेला हूं और बेटे के मोह में कुछ ना कर सका " " मुझे माफ कर दीजिए अंकल मैने आपके बारे में पता नहीं क्या-क्या सोचा" " बेटा तुम्हारी कोई गलती नहीं मैं भी शायद होता तो ऐसे ही सोचता हर रोज बस घर को देखकर यादें जिंदा रखना था यही मेरे जीवन का सहारा था"। शाम को मिस्टर खन्ना वापस जाने की बात करते हैं तो रोहन कहता है" अंकल यह क्या बात हुई? हम भी तो आपके बच्चे हैं घर भी आपका ही है बस हमारी शक्ल थोड़ी अलग है आपके बेटे से " उसने मजाकिया अंदाज में कहा "नहीं बेटे तुम तो लाखों में एक हो भगवान सबको तुम जैसी औलाद दे तुमने मुझे अपनों से ज्यादा अपना माना" " बस अब बेटा बोल दिया है तो कहीं जाना नहीं है आज से हम और हमारा घर आपका आज आपकी बहू का जन्मदिन है आशीर्वाद दीजिए " अमृता ने झुककर मिस्टर खन्ना के पैर छुए तो आशीर्वाद स्वरुप अपना हाथ उन्होंने उसके सर पर रख दिया और अपने कमरे में चले गए ।कुछ देर बाद वापस लौटे तो उनके हाथ में दो सोने की बालियां थी जिसे उन्होंने अमृता को देते हुए कहा "बहू यह मेरी पत्नी की आखिरी निशानी है आज से तुम्हारी " "पर अंकल नहीं नहीं पिताजी इसे अभी क्यों दे रहे हैं? "क्या पता मैं अगले साल रहूं या ना रहूं इसलिए इसे स्वीकार करो मुझे खुशी है कि भगवान ने जो सुख मुझसे छीन लिया था वह तुम दोनों के रूप में मुझे मिल गया अब जिंदगी से कोई शिकायत नहीं"।

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