खुशी
दीवाली के प्रकाश से सारा शहर जगमगा रहा था ।मिसेज खन्ना बर्तनो का एक सेट ले गयी थी और पूरे किचन के बर्तन उतारकर सारे नये बर्तनो को करीने से सजाने लगी और पुराने के बारे में सोचा कि कबाड़ वाले को या जिसे जररूत हो दे दिया जाएगा । मिसेज खन्ना की कामवाली ने आते ही पूछा 'मैडम, आज क्या इतने बर्तन साफ करने होंगे ?' अरे नहीं तुम घर की सफाई में मेरी हेल्प करो ये तो पूराने बर्तन है इन्हे कबाड़वाले को देना है। यह सुनकर कामवाली ने बर्तनो पर नजर डाली। तुरंत उसकी नज़र एक पतीले पर पड़ी। उसने मिसेज खन्ना से पूछा 'मेम साहब आप बुरा न माने तो एक बात कहूँ ?' ' हाँ-हाँ बोल क्या कहना है?' ' आपके पुराने बर्तनो में से मैं ये पतीला ले लूँ , घर का पतीला टूट गया है। ' 'अरे तो इतना संकोच क्या? ले जा , जरूरत है तो सारे ले जा ' कामवाली यह सुनकर बहुत खुश हुई जाते समय उसने एक बड़े से झोले में जितना भर सकता था उतने बर्तन रख दिए और ख़ुशी-ख़ुशी घर लेकर चली गयी उसे ऐसा रहा था मानो आज खजाना हाथ लग गया हो ।
घर आते ही उसने सबसे पहले सारे पुराने टूटे हुए बर्तन हटाकर लाए हुए बर्तनो को सजा दिया। इतने में दरवाजे पर एक भिखारी ने आवाज दी ' कुछ खाने को मिलेगा? बहुत भूखा हूँ ' ' हाँ -हाँ बाबा रूकिये अभी कुछ लाती हूँ कहकर वह रोटी सब्जी लाती है, पहले तो वह उसे हाथ में दे रही थी बाद में उसने सोचा ये बर्तन अब मेरे काम के तो है नहीं क्यों ना इसमें से ही कुछ दे दूँ। यह सोचकर उसने एक टूटी हुई थाली उठाई और उसमे ही वह रोटी सब्जी रखकर उस भिखारी को दे दिया। खाना खाकर भिखारी तृप्त हो गया। उसने आर्शीवाद देते हुए कहा ' बेटी सदा खुश रहो आज दिवाली के दिन तुमने मेरी भूख मिटाई है, ईश्वर तुम्हे हमेशा खुश रखे'यह कहकर उसने पीने के पानी के लिए कहा । कामवाली ने उन्ही पुराने बर्तनो में से एक गिलास निकाला और बाबा को पानी दे दिया। बर्तन वापिस करने पर उसने कहा 'बाबा ये ले जाइये ,और किसी बर्तन की जरूरत हो तो भी बताइये ' 'सच बेटा ' भिखारी की आंखे ख़ुशी से चमक उठी ' जी बाबा आप ये गिलास और ये थाली ले जाइये आपको एक कटोरी और एक चम्मच भी देती हूँ जिससे कि आप ठीक से खाना खा सके' ।
भिखारी निशब्द मानो तीनो लोको का खजाना मिल गया हो। आज तीन लोगो की जिंदगी में रौनक थी। मिसेज खन्ना का किचन नये बर्तनो से जगमगा रहा था। कामवाली का किचन उनके बर्तनो से और भिखारी की झोली कामवाली के दिए बर्तनो से।
किसी चीज की सही कीमत का अंदाजा उसके जरूरतमंद को ही होती है। ख़ुशी के मायने सब के लिए अलग होते है जरूरत है तो बस उसे महसूस करने की।
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