रोशनी
दीवाली का माहौल था।
चारों तरफ बाजार सजे हुए थे। एक से बढ़कर
एक लाइट, झालर पूरा बाजार रौशनी से चमचमा रहा था। सड़क से
दूर एक बच्ची दिए बेच रही थी पर झालरों की चमक दमक में दियो पर किसी का ध्यान ही नहीं जा रहा था। राधा भी अपने पति के
साथ बाजार आयी थी खरीददारी करने। खरीददारी
करते करते वह थक गयी और एक किनारे सड़क पर पड़े बेंच पर बैठ गयी और उसकी नजर
दूर दिए बेचती उस लड़की पर पड़ी और उस बच्ची पर पड़ी वह सबको दिया ख़रीदने को कहती रही
पर सब अनसुना कर के चल देते. उसकी की मासूमियत
देखकर राधिका का दिल पिघल गया। उसने सोचा कि वह बच्ची से दिए जरूर खरीदेगी, पति के वापस आने पर वह
उससे दिए खरीदने को कहती है उसका पति
विनोद झल्ला जाता है और ' इतना तो कुछ खरीद लिया अब दिए खरीदकर क्या करोगी ?'' चलो ना काम ही आयेंगे ' दोनों बच्ची के पास जाते
है और दिए का दाम पूछते है और फिर कहते है हमें सारे दिए दे दो।बच्ची खुश हो जाती
है। राधिका से रहा न गया उसने बच्ची से पूछा कि इतनी कम उम्र
में यह काम क्यों कर रही हो माता -पिता कहाँ है ' बच्ची ने कहाँ ' कुछ दिन पहले मेरे माता -पिता की मृत्यु हो गयी
है अब मैं अनाथ हूँ यह सुनकर राधिका दुखी हो गयी उसने अपने पति से कहा कि वह उस
बच्ची को कुछ पैसे और दे जिससे कि वह भी दीवाली मना सके। राधिका के अधिक पैसे देने पर वह बच्ची बोली 'मेमसाहब अधिक पैसे क्यों दे रही है ?' राधिका ने कहा 'रख लो हम अपनी ख़ुशी से दे रहे है कल दीवाली अच्छे से मनाना' ' पर मै दीवाली मनाऊँगी
किसके साथ मेरे तो घर पर कोई है ही नहीं 'सुनकर राधिका उदास हो गयी पूछा 'रहती कहाँ हो तुम? 'सामने वाली झुग्गी में।
राधिका और उसके पति दिए लेकर चले गये। अगले दिन
वह बच्ची अपने घर आती है तो देखती है कि उसका पूरा घर सजा है
उसकी आश्चर्य की सीमा नहीं
रहती कि मेरा घर किसने सजाया होगा? तभी उसे राधिका
दिखाई देती है साथ में उसका पति भी था।
राधिका ने बच्ची को शुभकामना दी और पूछा अपना नाम तो बता दो 'स्वीटी नाम है
मेरा ' स्वीटी हमरे साथ दिवाली मनाओगी? ''जी मेमसाहब बहुत ख़ुशी हुई मुझे और आज ऐसा लगने
लगा कि आज मेरा भी कोई है '
सिर्फ आज नहीं हम
हमेशा के लिए तुम्हारे होना चाहते है
तुम्हारी हर ख़ुशी और गम में ''मैं समझी नहीं मेमसाहब ' 'हमारी कोई औलाद
नहीं हैं ' कल तुम्हे देखकर न जाने क्यों बहुत प्यार आया
और यह सुनकर कि तुम अनाथ हो मैंने एक निर्णय ले लिया कि ईश्वर ने हमें औलाद नहीं दी और तुम्हारे माता-पिता नहीं है। इसलिए हम एक दूसरे का सहारा है तो
क्या तुम मेरी बेटी बनोगी? स्वीटी की ख़ुशी
का ठिकाना ना रहा बोली 'मेमसाहब आप बहुत अच्छी है ' ये मेमसाहब कौन है? जब तुम मेरी बेटी हो तो मुझे माँ कहो
आज दीवाली के दिन लक्ष्मी मेरे घर स्वयं
आयी है मुझसे ज्यादा भाग्यशाली कौन होगा? मेरे जीवन की हर कमी पूरी हो गयी' स्वीटी भी माँ
कहकर राधिका से लिपट गयी। आज बाहर के साथ साथ राधिका और स्वीटी के जीवन में भी नयी रौशनी ने दस्तक दी।
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