दिखावा
'अरे कविता तू सोशल मीडिया
पर नहीं है? कीर्ति ने
आश्चर्य से पूछा ' नहीं मैं तो नहीं हूँ ' अरे क्या बात कर रही है
आजकल सोशल मीडिया का जमाना है जिस पर करो कम पर दिखा ज्यादा सकते है खासकर आजकल रील्स का
जमाना है चल आज तुझे दिखाती
हूँ , कहकर कीर्ति उसे
जबरदस्ती अपने साथ ले गयी। रास्ते
में चाय देखकर दोनों चाय पीने रूक गयी। अचानक कीर्ति के दिमाग में एक आईडिया आया। उसने कविता को मोबाइल पकड़ाते हुए कहा अब जो मै
अब कहने जा रही हूँ बस तू उसका वीडियो बना
लेना फिर बताऊँगी तुझे इसका क्या करना है और सोशल मीडिया की ताकत बस तू देखती जा।
कविता ने मोबाइल हाथ में लेकर शूट करना शुरू कर दिया। कीर्ति ने ५०० का नोट निकलते
हुए चाय वाले से बोली 'लो बाबा रख लो तुम्हारे काम आयेंगे ' चाय वाले के मना करने पर
उसने कहा 'बाबा मै तो
तुम्हारी बेटी जैसी ही हूँ रख लो ' यह सुनकर चाय वाले ने उसे रख लिया और कविता और कीर्ति अभी
थोड़ा ही आगे बढ़ी थी कि एक १४-१५ साल की लड़की वहाँ आयी उसने चाय वाले की तरफ देखते
हुए कहा 'बाबा भूख लगी है
एक बिस्कुट दे दो पर पैसे नहीं है ' चाय वाले ने उसकी दशा
देखकर बिस्कुट भी दे दी साथ ही ५०० का वही नोट जो उसे अभी थोड़ी देर पहले मिला था
उसने लड़की की तरफ बढ़ाते हुए कहा 'लो बेटा इसे भी रख लो और अच्छे से खाना खा लेना ' पास में कीर्ति कविता सब
देख रही थी। कीर्ति को गुस्सा आ गया और वह
गुस्से में वापस आकर चाय वाले से बोली ' बाबा आपकी हालत पर तरस
खाकर मैंने आपको पैसे दिए और आपने उसका
अपमान करते हुए एक भिखारन को दे दिया इतना
तो आप एक दिन में कमा भी नहीं पायेंगे ' चाय वाले ने उत्तर दिया 'बेटी इसमें गुस्सा क्या
करना , तुमने मुझे
जरूतमंद समझा मैंने उसे तो दे दिया इसमें
गुस्सा क्या करना ? पर कीर्ति का गुस्सा शांत नहीं हो रहा था। तभी वहाँ एक लंबी सी
चमचमाती सफेद गाड़ी रुकी और एक
नौजवान ने गाड़ी से उतर कर कहा 'पिताजी घर चले ?' अब तो कीर्ति का मुँह आश्चर्य से खुला ही रह
गया वह खुद को युवक से यह पूछने से रोक नहीं पाई कि वह उस चाय वाले को पिताजी
क्यों कह रहा है ? युवक ने जवाब देते हुए कहा ' ये मेरे पिताजी ही है तो
हो कहूंगा ना?
' कीर्ति ने व्यंग से कहा 'खुद तो सूटेड-बूटेड कार से चलते हो और बाप से काम करवा रहे
हो ?' युवक ने जवाब
दिया 'देखिए आप
गलत समझ रही है मेरे पिताजी रिटायर्ड आर्मी अफसर है और ये
उनकी अपनी पसंद है कि खाली समय वे कैसे बिताना चाहते है ? ' अब कीर्ति शर्म के मारे उन चाय वाले से नजर नहीं मिला पा रही थी फिर भी वह हिम्मत
कर के बोली 'अंकल जी मुझे माफ़ कर दीजिये मैंने आपके साथ गलत व्यवहार किया' तब उन चाय वाले ने उसे
समझाते हुए कहा ' बेटा माफ़ी की कोई जरूरत नहीं आज से वैसा बनाने की
कोशिश करो जैसा दिखाना चाहती हो मदद दिल से होती है दिखावे के लिए नहीं।
कीर्ति ने कहा ' आज से आप की तरह बनने की
कोशिश करूँगी और न तो दिखावे के लिए मदद करूँगी और न ही इस तरह की रील्स बनाकर
सोशल मीडिया पर डालूँगी मुझे माफ़ कर दीजिये ,उन बुजुर्ग चाय
बनाने वाले ने मुस्कराते हुए अपना हाथ आर्शीवाद के रूप में उसके सर पर रख दिया।
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