अनोखी शर्त

 


आज सुबह से माँ बहुत खुश नज़र आ रही थी। आखिर इतने दिनों बाद उनके मन की मुराद जो पूरी हो रही थी।  आज एक ऐसा लड़का घर आ रहा था जो घर में भी सबको पसंद था और मुझे भी और शायद मैं भी ये विवाह करना चाहती थी। मतलब सब कुछ तय था बस औपचारिकिता मात्र  शेष  थी जो शाम तक पूरी होने वाली थी ।

शाम को चार बजे दरवाजे की बेल बजी और माँ ने ख़ुशी -ख़ुशी दरवाजा खोला।  स्वागत सत्कार के बाद माँ ने औपचारिकतावश पूछ ही लिया कि मैं उन लोगो को कैसी लगी?लड़के की माँ ने कहा 'बहन जी लड़की हमें बहुत पसंद है ,  भगवानने रूप रंग योग्यता सब दी है और हमें क्या चाहिए  हमें ऐसी ही लड़की चाहिए थी " फिर उन्होंने मुझसे कहा बेटा अगर तुम लड़के से बात करना चाहती हो , कुछ पूछना चाहती हो तो पूछ सकती हो 'मैंने लड़के से कहा 'मेरी बस एक शर्त है ' शर्त ! सब एकदम से मुझे देखने लगे।  माँ ने मुझसे कहा 'बेटा  तुम ये क्या कह रही हो , कैसी शर्त ?मैंने कहा शादी के बाद माँ मेरे साथ ही रहेगी , यही शर्त है 'माँ ने मुझे डाँटते हुए कहा ये क्या बोल  रही है , ऐसी शर्त कौन रखता है आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ ' 'पर माँ मैं ऐसा करना चाहती हूँ आज मैं जो हूँ तुम्हारी वजह से ही तो हूँ।  फिर जब तुम्हे सहारे की जरूरत है छोड़ कैसे दूं? '' पर बेटा यही दुनियाँ   का चलन है शादी ऐसे ही होती है ' माँ ने कहा ' नहीं माँ मैं नहीं मानती ऐसे चलन को ' लड़के की माँ और लड़का सारी बात ध्यान से सुन रहे थे। तभी लड़के ने कहा 'माँ का ध्यान तो आप मेरे घर से भी रख सकती है ,हम कभी-कभी आ कर माँ जी का हाल -चाल लेते रहेंगे ,और पैसो की जरूरत हुई तो वो भी देख लेंगे ''और माँ को सेवा की जरूरत हुए तो वो कौन करेगा ?' मैंने कहा इस बात पर सब चुप हो गये।  क्योकि मैं  और बस मैं ही एक मात्र तो एक दुसरे का  सहारा थे। थोड़ी देर की ख़ामोशी के बाद लड़के की माँ बोली 'बेटा  हमे तुम्हारी यह अनोखी शर्त मंजूर है।  जो लड़की अपनी माँ का इतना ध्यान रखती हो उम्मीद करती हूँ वह मेरा भी ध्यान जरूर  रखेगी। माँ जी मैं भी आपको शिकायत का मौका नहीं दूँगी अभी मैं एक माँ के साथ रहती हूँ शादी के बाद दो माँ के साथ रहूँगी मुझे दो मां का प्यार मिलेगा और मैं भी दो माँ की सेवा कर दोहरा लाभ ले पाऊँगी. मैंने लड़के की ओर देखा उसकी नजरो में भी इस अनोखी शर्त का सम्मान था और मेरी नजरो में उसका।

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