ओल्ड एज होम

 


 

सात वर्षीय रोहन घर में कई दिन से एक ही शब्द सुन रहा था। "ओल्ड ऐज होम " पहले तो उसने ध्यान नहीं दिया ,लेकिन बार बार सुनकर उसकी उत्सुकता बढ़ गयी। पहले वह दादी के  पास गया ,फिर दादा के पास , पर दोनों ही घर के कामो में लगे थे। दोनों को व्यस्त देखकर वह मम्मी पापा के कमरे की और गया।  यहाँ उसे मम्मी का स्वर सुनाई दिया ' सुनो जी , मैं तो तंग गयी हूँ , कभी चश्मा ठीक करा दो, कभी दवा ला दो , कभी मंदिर ले चलो ,हर रोज एक नयी फरमाइश ',कब भेज रहे हो इन्हे ओल्ड ऐज होम में ? अगला स्वर उसके पापा का था " बस कुछ दिन इंतज़ार कर लो फिर हमेशा के लिए इनसे छुटकारा मिल जायगा। 

रोहन को समझ नहीं आया कि क्या बात हो रही है। किस छुटकारे की बात ? लेकिन ये जरूर समझ आया कि वह दादी और दादा के बारे में बाते कर रहे है। वैसे भी मासूम मन में भी  हमेशा दादी दादा को काम करते देखकर यह सवाल तो  उठता ही था कि  इतना काम क्यों कर रहे है ? ऊपर से इन सब बातो से नासमझ रोहन भी  समझ आया कि कुछ तो ठीक नहीं है उनके  लिए ।उसने यह निश्चय किया कि  वह मम्मी से ही पूछेगा कि ओल्ड ऐज होम क्या होता है? एक दिन उसकी माँ की कुछ सहेलियाँ घर आती है। दादी सबकी खातिरदारी कर रही होती है, माँ सहेलियों के साथ गपशप में मशगूल तभी नन्हा रोहन वह आता है और सबके सामने मम्मी से पूँछता है  कि '  मम्मी,  ये ओल्ड ऐज होम क्या होता है ? उसके माँ हँसी -मजाक के मूड में  बच्चे के मुँह इस सवाल के लिए तैयार थी। उसके समझ नहीं रहा  था कि वह क्या कहे ? अचानक उसने कहा कि बेटे जैसे तुम स्कूल जाते हो वैसे ही बूढ़े लोग ओल्ड ऐज होम जाते है। तब रोहन बोला 'मम्मी क्या दादा दादी भी ओल्ड ऐज होम  चले जायेंगे ?उसके बात सुनकर उसकी माँ ने थोड़ा सकुचाते हुए कहा "हाँ बेटा , ऐसा ही होता है , सब बूढ़े लोग जाते है , वैसे भी तुम्हारे दादी-दादा को उनके पसंद के ओल्ड ऐज होम में भेज रहे है"

 तब रोहन बोला  ठीक है मम्मी आप को कौन सा ओल्ड ऐज होम  पसंद है ? यह बात सुनकर उसकी माँ अचकचा सी गयी , बोली "  ,मै क्यों जाऊँगी ओल्ड ऐज होम ? अभी  तो अभी जवान हूँ।“” पर जब आप बूढी हो जाएँगी तब मुझे ही ना आपको ओल्ड ऐज होम  भेजना पड़ेगा।  इसलिए मैंने पूछा। 

रोहन की माँ और उसके सहेलियाँ नन्हे रोहन के मुँह से ये सुनकर जैसे सकते में गयी।  सब एक दुसरे का मुँह देखने लगी। रोहन की माँ को नन्हे रोहन के मुँह से कड़वी सच्चाई सुनने को मिली , जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।

सहेलियों को विदा कर वह  अपने सास -ससुर के कमरे में गई , और माफ़ी मांगते हुए बोलीबाबूजी -माँजी माफ़ कर दीजिये 'मैंने जो आप लोगो के साथ किया वो गलत था और आप सब कही नहीं जा रहे”।  आज मुझे समझ आया कि अपने औलाद के मुँह से यह सब सुनकर कैसा लगता है '' पर बहू , हुआ क्या ? हमने तो अपनी पैकिंग भी कर ली है ' उसकी  सास ने कहा। ' नहीं माँ जी , अब आप कही नहीं जा रही '

तभी रोहन कमरे में चला आता है और अपनी माँ को रोता  देखकर बोलता है ' दादा -दादी ओल्ड ऐज होम  जा रहे है , इसलिए आप रो रही है।  उसकी माँ यह सुनकर और सिसक कर रोने लगी , बोली ' नहीं मेरे बच्चे , दादा -दादी कही नहीं जा रहे , वो मैंने कुछ गलती की थी ना , तो मुझे डॉट पड़ी दादा -दादी से , इसलिए रो रही थी , जैसे तुम  रोते  हो "रोहन ने दादा जी तरफ उंगली हिलाते हुए कहा कि ' दादा जी , इन्हे माफ़ कर दीजिये ना , देखिये अब तो ये  रो रही है और उन्होंने सॉरी भी बोल दिया ' सब एक दुसरे का चेहरा देख रहे थे।  रोहन की माँ ने आँसूओ से अपना प्रायश्चित्त कर लिया था। अब बारी  दादा-दादी की थी - उन्हें माफ़ करने की। दादी ने अपना  बड़प्पन दिखाते हुए कहा ' बेटा हम तो तुम्हारी मम्मी को समझा रहे थे कि 'गलती नहीं करते बस ' रोहन बोला  तो मतलब आपने इन्हे माफ़ कर दिया ? " अरे हम नाराज़ ही कब थे , रोहन के दादा जी ने हॅसते हुए कहा। 

रोहन बोला  ' और ओल्ड ऐज होम कौन जाएगा? ' वह हम  छुट्टियों  में जायेंगे' ' मै भी साथ चलूँगा ना ' रोहन ने पूछा । ' जरूर ' दादी ने कहा , बच्चे के मन में ओल्ड ऐज होम की बुरी छवि जो हटानी थी। “फिर  तो ओल्ड ऐज होम अच्छा  है।“  यह सुनकर  सभी एक साथ खिलखिला कर हँस पड़े

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