हकदार
नीता जैसे जैसे सीढ़िया चढ़ रही थी वैसे वैसे उसका दिल धड़क रहा था लेकिन उसने जैसे -तैसे दिल की धड़कनो को काबू में करके उसने गेट के अंदर प्रवेश किया। इतना शानदार ऑफिस उसने
पहले कभी न देखा था। फर्श ऐसे चमक रहा था जैसे आईना।
रिसेप्शन पर एक अति सुंदर युवती थी जो धाराप्रवाह अंग्रेज़ी में बात कर रही थी। नीता को एक तरफ ख़ुशी हो रही थी , एक तरफ डर भी लग रहा था।जो की उसके जैसी रंग रूप वाली लड़की के लिए लाज़मी भी था। क्या होगा मेरा?
शायद देखते ही बोले कि "आप उपयुक्त नहीं या फिर " ख्यालों की आंधी चल रही थी मन में। तभी अचानक रिसेप्शन से आई एक मधुर आवाज ने उसका ध्यान भांग किया " हाउ मे आई हेल्प यू ?" हड़बड़ी में नीता बोली " वो मैं, .मै इंटरव्यू के लिए आयी हूँ। "फॉर व्हिच पोस्ट "अगली ध्वनि रिसेप्शनिस्ट की थी ." फैशन डिजाइनर
" . जैसे ही नीता ने ये बोला रिसेप्शनिस्ट के साथ साथ अन्य कैंडिडेट्स का भी मुँह बन गया था ।
पर एक महिला वहां थी ,जिसने उसे ध्यान से देखा । नीता एक साइड में बैठ गई। सभी उसे देखकर खुसर -पुसर करने लगे क्योकि वह बहुत ही साधारण नैन -नक्श वाली सावंली सी
लड़की थी।साथ ही कपडे भी उसने बहुत ही साधारण से पहने थे। बाकि अन्य लड़किया जैसे मॉडल। उनके सामने तो अब नीता का मन भी धड़कने लगा। तभी एक लड़की ने कहा " लोग दुसरे का टाइम ख़राब करने आ जाते है। पोस्ट फैशन डिज़ाइनर की और हुलिया…. एक बार बार खुद को आइने तो देख
लिया होता"। हालाँकि यह बात उसने धीरे से कही थी पर यह बात नीता के कानो में पड़
गई। एक तो वह खुद घबरा रही थी , उसपर यह सुनकर उसका रहा सहा आत्मविश्वास भी जाता रहा।
उसका मन किया की वह अभी उठकर चली जाए , पर माँ की
बात याद कर के कि
"कभी हिम्मत मत हारना " और वह उठकर भी वापस बैठ गई।यह सोच कर कि अब
चाहे कुछ भी हो आई हूँ तो इंटरव्यू देकर ही जाउंगी।
इंटरव्यू शुरू
होता है। सभी का एक-एक करके बुलावा आता है फिर सभी को इंतज़ार करने के लिए बोलकर पुनः बैठा दिया जाता है कि अभी आपस में बात कर संस्था के लोग उम्मीदवार का चयन करेंगे ।नाम अभी बताया जाएगा, इसलिए सभी लोग बैठे रहे । कुछ देर के बाद जिन लोगो का चयन नहीं हुआ ,उन्हें जाने के लिए बोल दिया गया। नीता का तो दिल ही बैठ गया कि जब इतनी सुन्दर और आधुनिक लड़किया न चुनी गयी तो मेरा तो कोई चांस ही नहीं। एक एक कर के सब जा रही थी।
पर सबके मन मे उत्सुकता थी कि आखिर चयन किसका हुआ। सभी उम्मीदवार जा चुके थे। नीता और दो ही बाकी थे
. दो को भी जाने के लिए बोल दिया गया। अब बारी नीता की थी। उसका दिल जोरो से धड़क रहा था। साँसे तेज हो गई। तभी नीता से चपरासी ने कहा ,आपको अंदर बुलाया गया है। यह सुनकर नीता को जैसे कानो पर विश्वास नहीं हुआ। वह डरते हुए अंदर गई। "मे आई कम इन " बस उसके आगे जैसे शब्द न थे। पर तभी उसकी नजर उस महिला पर पड़ी जो उन लोगों के साथ बैठी थी। उस एक को छोड़कर बाकि सबने उसका मजाक बनाया था। वह महिला बोली " कंग्रेटुलेशन यू आर
सिलेक्टेड" और यह कहकर अपॉइंटमेंट लेटर उसके हाथ में पकड़ा दिया। पर नीता अब भी खड़ी थी। उसके चेहरे पर न जाने कितने ख्याल थे। महिला उसके मनोभावों को समझ गई और उसे समझाते हुए बोली मैं इस संस्था की डायरेक्टर हूँ। मुझे एक मेहनती और काबिल उम्मीदवार चाहिए
था। मैंने सभी सभी लड़कियों की प्रोफाइल देखी ,जो सामान्य से ज़्यादा न थी। भले ही वह देखने में हद से ज्यादा खूबसूरत हो। लेकिन हमें मॉडल नहीं डिज़ाइनर चाहिए। वो सारा ध्यान अपने काम में लगा सके न कि बस खुद पर। इसलिए हमने तुम्हे चुना। उम्मीद है की हमारा चयन हमारी संथा के लिया सर्वोत्तम होगा। है न? " जी जी. . मै अपना १०० परसेंट दूंगी। गुड आप कल से ही आ सकती है। नीता ख़ुशी के मारे रूआंसी हो गई थी। जैसे ख़ुशी समेटी न जा रही हो। जा रही हो।
उसके चयन ने
उसे नए आत्म विश्वास
से भर दिया की किसी सम्मान का असली हक़दार उसकी योग्यता
ही होती है न कि बहुत सुंदरता या दिखावा।
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