देवता

 अरे !तुम अभी तक तैयार नहीं हुई ? वो लोग बस आते ही होंगे नीता ने आश्चर्य से कहा पर मुझ पर तो जैसे किसी के आने से कोई उत्साह ही नहीं होता और पता नहीं क्यों एक के बाद एक न जाने कितने आ चुके और स्पष्ट ना कहकर तरह-तरह के बहाने बनाकर मना कर दे देते लेकिन असली कारण था उनकी कभी न मिटने वाली या जो कह सकते हैं कि दहेज का दानव सामने आ ही जाता।महान होने का ढोंग करने वाले बात को सीधी तरह से ना कह कर कभी  सामाजिक व्यवस्था  कभी अन्य तरह-तरह की बातें करते थे और हर बार मेरी नफरत ऐसे लोगों के लिए बढ़ती ही जाती मेरा मन जैसे विद्रोही सा हो गया था कि बस अब और नहीं पर घरवालों की उम्मीद शायद अभी नहीं टूटी और हर बार की तरह आज भी एक बार फिर वही सब दोहराया जाना था मन में विचारों की आंधियां चल रही थी आखिर कब तक ?तभी नीता ने जैसे नींद से जगा दिया '' सपने बाद में देखना अभी तो तैयार हो जाओ'' कहते हुए खिलखिलाकर कमरे से बाहर चली गई और ना चाहते हुए भी उस दिखावे का हिस्सा बनने के लिए मुझे जैसे खुद को तैयार करना पड़ा।

कमरे में लड़के की मां ,मामा और लड़का खुद था। सुना था सरकारी नौकरी में है और उसको देखते ही शायद मेरा धैर्य जवाब सा  दे गया और मन ही मन यह सोचने लगी जब प्राइवेट नौकरी और साधारण से दिखने वाले  लड़के भी इतनी लंबी लिस्ट रखते हैं तो यह तो शायद हमारे सर पर छत भी ना छोड़े और दिखने में भी वह काफी आकर्षक था इसलिए मन में कोई गुंजाइश नहीं थी। हालांकि रंग रूप में मैं किसी से कम नहीं थी और कुछ शिक्षक भी थी कमी थी तो बस एक सरकारी नौकरी याद दहेज की और इस वजह से बार-बार इस प्रताड़ना का शिकार  होना पड़ता था। दिल में आता कभी-कभी साफ मना कर दूं नहीं करना मुझे यह सब बस चैन  और सम्मान से जीने दो पर घर वालों का मुंह देखकर हर बार यह अपमान सहना पड़ता था जो लोग मेरे रूप रंग की बड़ाई  करते शिक्षा की तारीफ करते  वह साथ ही यह भी सुना देते थे हमें कौन सी  नौकरी करवानी है? बस अच्छी बहू चाहिए और उस अच्छाई के दायरे में दहेज का दानव आ ही जाता और कभी कुंडली कभी यह कभी वह इंकार की वजह कुछ भी हो सकती थी।

मेरे विचारों की आंधियों को लड़के की मां की आवाज ने रोका और पूछा की मैं क्या घर का सब काम कर लेती हूं ?जवाब मिलने पर सवालों की एक लंबी से फेहरिस्त। समझ नहीं आ रहा था बहु चुन रहे हैं या कामवाली? फिर भी हर सवाल का जवाब दिया अब बारी थी लड़के की। लड़का कुछ बोल पाता इससे पहले उसके मामा जी ने दुनियादारी की आड़ में दहेज का तीर  साधते  हुए पूछा और बिटिया की शादी का कितना संकल्प है? जवाब मन मुताबिक ना मिलने पर तरह तरह का सामाजिक ज्ञान मैं चुपचाप सब सुन रही थी मन में आ रहा था अभी  इनको जाने के लिए कह दूं तभी अचानक लड़के ने मामा जी को रोकते हुए कहा ''मैं लड़की से कुछ बात करना चाहता हूं'' हम दोनों दूसरे कमरे में चले गए जहां वह  मेरे चेहरे के मनोभाव से समझ गया था कि मेरे मन में क्या चल रहा है ?उसने मुझे सहज करते हुए पूछा आपका नाम क्या है ?किसी ने अब तक यह तो पूछा ही नहीं ?नाम बताने पर दूसरा सवाल खाने में क्या-क्या बना लेती हूं ?और साथ ही हंस  भी पड़ा स्वाद  का शौकीन हूं ना  तो आपको अलग अलग डिश बनाना होगा उसकी यह बात सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ उसने फिर पूछा नौकरी करनी है शादी के बाद ?मैंने बोला जरूरत हुई तो मेरी बात पूरी होने से पहले ही वह बोल पड़ा मेरी तरफ से कोई बंधन नहीं जो भी करना है करिए।मैं खीझ कर बोला आप तो ऐसे बोल रहे है जैसे रिश्ता पक्का हो गया है। यह कहते हुए मैंने प्रश्नवाचक नजरिए से उसकी तरफ देखा और उसकी एक मुस्कुराहट से जैसे जवाब भी मिल गया हो वह बोला आपका अपना टाइम थोड़ी ना खराब कर रहा था सच  पूछो तो मुझे जिस तरह के दहेज की  जरूरत थी आज मुझे मिल गया पर मामा जी मेरे मुंह से निकल पड़ा ''उनकी परवाह ना करें ''मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था यह क्या हो रहा है लोगों के ताने कानों में गूंज रहे थे समझौता कर लो देता तो आएंगे नहीं पर जो अभी-अभी कमरे से बाहर गया वह किसी देवता से कम तो ना था बाहर आते ही उसने अपने घरवालों से कहा ''मुझे लड़की पसंद है'' यह बात सुनकर मामा जी नाराज हो गए पर लड़के के आगे  उनकी एक न चली और बिना मन के ही सही उन्होंने हमारे रिश्ते की बात की और एक तिथि तय हुई विवाह की।

नियत समय पर मेरा विवाह संपन्न हुआ और आज पहले करवा चौथ के दिन पूजा के बाद मैंने  छलनी में  चांद के साथ एक और देवता के दर्शन किए वही देवता जो लोगों के तानों से निकलकर मेरी जिंदगी में आ गया ।मेरे हाथ स्वत:  ही उससे चरणों में झुक गए।

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