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धन्यवाद

 "डॉक्टर साहब मेरे पापा को बचा लीजिए प्लीज डॉक्टर साहब थोड़ा सा समय दीजिए एक बार देख लीजिए उनको"आरुषि ने लगभग रोते हुए कहा ।श्रीकांत ने नर्स से पूछा "क्या केस है इनका" "सर उनके पिता का एक्सीडेंट हो गया है गंभीर चोट आई है अगर सर्जरी 1 घंटे में नहीं की गई तो उनका बचना मुश्किल है" "तो क्या समस्या है? सर्जरी की तैयारी करिए" श्रीकांत ने कहा। " सर उनके पास पैसे नहीं है फीस के फिर कैसे?" आरुषि ने हाथ जोड़कर कहा " सर प्लीज आप ऑपरेशन कर दीजिए एक या दो दिन में मैं आपके पैसे दे जाऊंगी नहीं तो आप छुट्टी नहीं करिएगा अभी मेरे पास बस यह एक सोने की अंगूठी है वह आप ले लीजिए प्लीज मेरा भरोसा करिए" " देखिए फीस हॉस्पिटल में जमा करना होता है मुझे नहीं मैं कैसे यह कर सकता हूं?" सर प्लीज आप कुछ करिए आपकी मदद भी तो कभी किसी ने की होगी" उसने याचना भरे स्वर में कहा श्रीकांत जैसे अचानक से यादों में खो जाते हैं फिर कहते हैं "चलिए देखते हैं क्या मामला है? मैं क्या कर सकता हूं ?श्रीकांत आरुषि के साथ उसके पिता को देखने वार्ड में...

अपना घर

  राहुल श्रद्धा ने शहर में आलीशान मकान बनवा रखा था। घर में सुख सुविधा की कोई कमी नहीं थी। राहुल  के माता-पिता गांव में रहते थे। राहुल ने उनसे कई बार कहा कि कुछ दिन वह उनके साथ ही रहे लेकिन माता-पिता कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल देते। राहुल को यही बात समझ नहीं आती थी कि सब कुछ के बाद भी वह क्यों यहां रहना नहीं चाहते? इस बार आर्यन के जन्मदिन पर जब पोते ने बहुत जिद की तो राहुल के माता-पिता मना न कर सके और राहुल के पास आ गए। राहुल श्रद्धा व उनका बेटा आर्यन सब बहुत खुश थे। कुछ दिन राहुल के माता-पिता भी बहुत खुश थे पर कुछ दिनों बाद ही वह यह सोचने लगे कि कब और कैसे वापस जाएं उन्होंने राहुल से बात की राहुल ने उन्हें कुछ दिन और रुकने की जिद की पर वह नहीं माने आखिर राहुल ने बोल ही दिया कि वह उन्हें रविवार को स्टेशन छोड़ देगा। वह बहुत परेशान था कि आखिर क्या कमी रह गई है यहां जो उसके माता-पिता यहां नहीं रहना चाहते उसकी परेशानी देख श्रद्धा ने कारण पूछा तो राहुल ने सब उसे बता दिया श्रद्धा ने उससे कहा कि वह मां पिताजी को कुछ दिन उसके भाई के यहां भेज दे फिर वापस आने के बाद गांव जाने के लिए बो...

मदद

कड़ाके की ठंड रात के 12:00 बजे थे तभी दरवाजे की बेल बजती है । अनुभा चहकते हुए कहती है" लगता है खाना आ गया प्लीज जाकर देख लेना "अनुभा का पति राजीव जो अब तक फाइलो में उलझा था गुस्से से बोल " आज खाना भी नहीं बनाया और देखना भी मुझे ही पड़ेगा?" " प्लीज चले जाओ ना ठंड से हाल बुरा है नहीं तो चली जाती "अनुभा के मिन्नतों के बाद राजीव सीढ़ियों से उतरकर गेट खोलता है सामने डिलीवरी बॉय ने उसे थोड़ा जल्दी पैसे देने का अनुरोध किया वह ठंड से पूरी तरह कांप रहा था। कपकपाते स्वर में वह बोला" सर थोड़ा गर्म पानी मिल सकता है क्या ?" "क्यों नहीं ?"ऊपर वाला राजीव जो गुस्से में नीचे आया था डिलीवरी बॉय की दशा देखकर एकदम से सहृदय हो जाता है "तुम रुको मैं आता हूं पर एक बात बताओ इतनी ठंड में जहां लोग रजाई में भी कांप रहे हैं तुम बिना स्वेटर के क्यों हो "? "सर यह मेरी नौकरी का पहला महीना है सैलरी नहीं आई है गांव से नया-नया आया हूं जल्दी-जल्दी में कुछ सामान भूल गया जिसमें स्वेटर भी था नई नौकरी है छुट्टी मिले कि नहीं इसलिए बस काम चल रहा हूं" ...

अपना

 रोहन ने जब से नया मकान खरीदा था, हर रोज सुबह एक वृद्ध उसकी चौखट को बड़े प्यार से निहार कर चले जाते थे एक दिन रोहन से ना रहा गया बागवानी करते समय जैसे ही उसकी नजर उन पर पड़ी उसने तुरंत ही उन्हें रोक लिया और पूछा" बाबा आप कौन हैं रोज यहां क्यों आते हैं और कुछ ना तो मांगते हैं ना बोलते हैं चले भी जाते हैं आखिर ऐसा क्यों? इस कॉलोनी में और भी मकान है पर आप यही क्यों आते हैं क्या रिश्ता है आपका इस मकान से एक साथ?" न जाने कितने सवाल पूछ लिया उसने बुजुर्ग व्यक्ति बिना कुछ बोले वहां से चला गया जिससे रोहन की उत्सुकता और भी बढ़ गई उसने अपनी पत्नी अमृता को यह बात बताई उसने तुरंत ही सतर्क होकर बोला" देखो नई जगह है पता नहीं कौन क्या है हमारे तो बच्चे भी हैं जमाना ठीक नहीं है क्या पता किसके मन में क्या चल रहा है मैं तो कहती हूं कि चौकीदार रख लो तुम हर समय तो घर में रहते नहीं" " अरे अरे रुक जाओ मैं एक छोटी सी बात बताई और तुम तिल का ताड़ बनाने लगी ऐसा कुछ नहीं वह आदमी शक्ल से शरीफ लगता है ना तो उसने आज तक कुछ मांगा ऐसे किसी पर शक करना ठीक नहीं हां मेरे मन में उत्सुकता जरूर है ...

सफलता

अनिकेश जी जैसे ही ऑफिस से घर आये वैसे ही पत्नी से   पूछा ' कार्तिक के रिजल्ट का क्या हुआ ?' रोहिणी जी ने बोली ' आप एक बार बात कर लीजिये उससे ' ' क्यों क्या हुआ ? तुम नहीं बता सकती   ?' ' क्या बताऊँ इस बार भी वह सफल नहीं हो पाया कह रहा था कि पापा के सपने को तोड़ दिया मन में ऐसा लग रहा खुद को फाँसी लगा लूँ या जहर खा लूँ '   सुनते ही अनिकेत जी ने घबराहट में बोले ' कैसी माँ हो तुम ये   क्यों बता रही हो तुरंत   कहना था ना अभी   फ़ोन लगाओ उसको ” ।   रोहिणी जी ने फोन लगाया पर फोन नहीं उठा।   अब दोनों बहुत घबरा गए। अनिकेत जी पागलों की ' तरह बार -बार उसे फोन करते रहे अंतिम में फोन उठा वीडियो पर कार्तिक का मुरझाया चेहरा साफ नज़र आ रहा था।   अनिकेत जी ने उसे डाँटते हुए   हुए पूछा ' फोन क्यों नहीं उठा रहे थे ' पापा किस मुँह से बात करूँ आपसे आपने मेरी हर जरूरत पूरी की लेकिन मैं फिर भी   आपका सपना पूरा न कर सका मुझे तो शर्म से मर ही जाना चाहिए ' अनिकेत रूंधे गले से बोले ' किस बात की शर्म कोई चोरी की तुमने ? किसी के साथ बदतमीजी  की है ? फ...

इलाज

    प्रियंका की सास जबसे उसके पास गाँव   से आयी है तब से उसने उनका बहुत ख्याल रखा समय पर दवा ऊपर के ए . सी . वाले कमरे में रहने की व्यवस्था सब कुछ।   लेकिन सास का स्वास्थ ठीक होने की बजाय पहले की अपेक्षा गिरता ही जा रहा   था जिसे देखकर बेटा बहू भी परेशान थे कि अब क्या करे ?   लोग तो यही कहेंगे कि   बहू -बेटे माँ का ध्यान नहीं रख रहे । एक दिन प्रियंका ने दवा देते वक्त सास से   पूछ ही लिया   ' माँ जी क्या आपको यहाँ कोई कमी है ? क्यों आप ठीक होने की बजाय और बीमार रहने लगी है ? लोग तो यही कहेंगे ना कि हम आप का ठीक से ध्यान नहीं रखते।   सास ने कहा “ बेटा तुम लोगो ने कोई कमी नहीं की है बस एक काम और कर दो “   वो क्या माँ जी ”? मेरा बिस्तर नीचे आँगन में लगवा दो '' ये आप क्या कह रही है माँ जी लोग क्या कहेंगे ? खुद सुख-चैन से कमरे में और सास को आँगन में छोड़ दिया हम ऐसा नहीं करेंगे ” कहकर प्रियंका चली गयी। दिन पर दिन   माँ जी की हालत में कोई सुधार न देखकर डॉक्टर बदले गए पर नतीजा वही। आख़िरकार थक - हार कर एक दिन मेरे बेटे ...