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दूसरा कौन?

  ' माँ मैं स्कूल जा रही हूँ ' ' अच्छा बेटा , नाश्ता कर लिया ? टिफिन रखा या नहीं '   ' ले लिया है माँ ' ' तुम भी   रोज - रोज एक ही बात परेशान कर देती हो ' तभी दूसरी आवाज आती है   ' आँटी   मैं भी जा रही हूँ ' ' तो जा न , कोई एहसान कर रही है क्या ? जा रही हूँ जा रही हूँ , कुछ ना कुछ लगा ही रहता है , कां ता जी ने झल्लाहट भरे स्वर में    कहा ।   कांता जी की एक ही बेटी थी निशा , जिसका पालन - पोषण करने में प्यार इतना ज्यादा कि वह बिगड़ ही गयी।   दूसरी ओर ख़ुशी जिसे जिसे उन्होंने डॉट - फटकार के अलावा कभी प्यार में दो बोल भी ना बोले हो । वह बेहद ही होशियार थी पढ़ने में खेल - कूद में , सभी में भाग भी   लेती और प्रथम भी आती। ख़ुशी को कांता जी के पति तीन बरस की अवस्था में घर लाये थे   जो उनके दोस्त की बेटी थी , माँ तो पहले ही दुनिया छोड़ चुकी थी। पिता को भी बीमारी ने कल का ग्रास बना...

मालिक

    'बेटा ऑफिस जा रहे हो? ' 'क्या माँ तुम्हे दिखाई नहीं देता? , हर समय कुछ न कुछ बोलती रहती हो ' रोहित झल्लाते हुए बोला। ' बेटा मेरी दवा ख़त्म हो गयी है वापसी में लेते आना ' ' अरे अभी परसों ही तो लाया था ''वो तो खाँसी   की थी बेटा , अभी घुटनो में बहुत दर्द हो रहा है ' 'क्या   माँ , कभी ये कभी वो , तंग आ गया हूँ 'रोहित की बात सुनकर माँ दुखी होकर बोली 'बेटा मै क्या जानबूझकर तुम्हे परेशान   करती   हूं ? ' जब तुम छोटे थे तो कितना परेशान करते थे।   पर मैंने ही हर   नाज उठाये '' माँ मै कितने साल छोटा था ' तुम बच्ची नहीं हो   , खुद ही कर लिया करो ये सब ' यह कहकर वह झल्ला कर   ऑफिस चला गया। पड़ोस की बालकनी में खड़ी सुधा को ये बिलकुल अच्छा न लगा। लेकिन वो कर भी क्या सकती थी। पर उसने सोचा की वही ऑन्टी   की मदद कर दिया करेगी। शाम को खाने की टेबल पर रोहित ने कहा ' माँ मै और निशा एक हफ्ते के लिए कही जा रहे है   , तुम अपना देख लेना। ...